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कन दिन आणा

द्यखदे द्यखदे कन दिन आणा। कव्वा छन यख मोती खाणा।। बसगळ्या मिंढका दींणा भासण। मूसा - बिरोळा ताळी बजाणा।। स्याळ चिफळचट छन खापेकी। बळ्द बिचारा डींगा चपाणा।। बेसरमी को नाच चौतरफैं । सीदा सच्चा छन सरमाणा।। लस्ट - पस्ट करि जौन छक्वैकी। वूँ फर छन अब द्यबता आता।।     ***************************                रचना - सुशील पुखर्याळ                                संगलाकोटी                                  पौड़ी गढ़वाल। Copyright@ Sushil Pukhryal -------------------------------------- --------------------------------------- उत्तराखंड की गढ़वाली हास्य/व्यंग्य कविता ; संगलाकोटी से गढ़वाली हास्य / व्यंग कविता ; एकेश्वर ब्लाक से गढ़वालीहास्य/ व्यंग्य कविता ; पौड़ी गढ़वाल से गढ़वाली हास्य/ व्यंग्य कविता ; मध्य हिमालय से  गढ़वालीहास्य /व्यंग्य/ कविता ; उत्तरी भारत से गढ़वाली हास्य/व्यंग्...

गढ़वळि साहित्य का शिखर पुरुष अबोध बंधु

गढ़वळि साहित्य मा बहुमुखी प्रतिभा का धनी, जण्यां - मण्यां, स्यूंसगत लिख्वार अबोध बंधु बहुगुणा जी कु नौ बड़ा आदर का दगड़ि लिये जान्द। यु आदर वूंतैं वूंका बड़ा नौ से न बल्कन बड़ा काम से मिल्द। पौड़ी जिल्ला की चलणस्यूं पट्टी का झाला गौं मा अबोध जी कु जलम ह्वे, 15 जून 1927 खुणि। आपक् पितजि कु नौ छयो - श्री खिमानंद बहुगुणा अर मांजी कु नौ श्रीमती बिन्द्रा देवी। आपकु मूल नौ नागेन्द्र बहुगुणा छौ। कक्षा 6 बटि नागेन्द्र कविता ल्यखण लगिगे। पौड़ी का मेस्मोर हाईस्कूल बटि दस पास कैरि रोजी रोटी की खोज मा परदेश ए गेनि। नौकरी का दगड़ि नागपुर विश्वविद्यालय बटि हिन्दी अर राजनीति विज्ञान मा मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री ल्हे। गढ़वळि का दगड़ा दगड़ि आपौ हिन्दी भाषा फर बि समान अधिकार छयो। उत्तर प्रदेश राज्य सेवा मा आप उप निदेशक का पद पर रैनि। आपल् कवितौं का दगड़ि कहानी,नाटक अर उपन्यास बि रचीं। बहुगुणा जी एक सक्षम आलोचक अर अनुवादक बि छया। 1950 बटि अबोध जी की कविता पत्र - पत्रिकौं मा छपण लगिगे। आपकि रचनौं कु विवरण च - महाकाव्य - भूम्याळ कविता संग्रै - घोल, दैसत, कणखिला, शैलोदय, तिड़का बाल कविता संग्रै - अंख - पंख...